अंतरात्मा
7:07 AM | Author: rohit

मै प्रेम नही , अधिकार नही , न भावुक अस्थिर विचार हूँ

न उज्जवल किरण प्रकाश की , न जटिल अन्धकार हूँ ।

न भ्रम हूँ , न हूँ वास्तविकता , न रूप न आकार हूँ

सदभाव नही , न मैत्री हूँ , न क्लेश न विकार हूँ ।


मै अंत-विहीन, मै विष-विहीन, मै द्वार हूँ आत्म निरिक्षण का

मै गुण-विहीन, अश्रु-विहीन, मै साक्ष्य हूँ हर एक क्षण का ।

मै बल हूँ, गति हूँ, साहस हूँ, मै आत्म-मंथन, मै आत्म-चिंतन

मै पथ विहीन हूँ हर पग पर, पर हर पथ का मै द्वार हूँ ।


मै प्रेम नही , अधिकार नही , न भावुक अस्थिर विचार हूँ

न उज्जवल किरण प्रकाश की , न जटिल अन्धकार हूँ ।


मै हृदय रहित, मै द्वेष रहित, मै अज्ञानी विद्वान् हूँ

न मिथ्या हूँ, न सत्य हूँ, न रचना कोई महान हूँ ।

न वेदों का गुणगान हूँ मै, न बाइबिल, न कुरान हूँ

मै दर्शक हूँ बस मार्ग का एक, नही मार्गदर्शक समान हूँ ।


मै मुख-विहीन, अस्तित्वहीन, मै स्थिरता का हूँ एक प्रतीक

मै भेष नही संस्कार हूँ बस, मै हर प्रश्न का उत्तर सटीक ।

विशवास हूँ मै विचारों का, मै पराकाष्ठा हूँ प्रश्नों की

मै आत्मा की भाषा हूँ, भावनाओं का सम्मान हूँ ।


न वेदों का गुणगान हूँ मै, न बाइबिल, न कुरान हूँ

मै दर्शक हूँ बस मार्ग का एक, नही मार्गदर्शक समान हूँ ।

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2 comments:

On August 31, 2009 at 5:01 AM , opeth said...

मै पथ विहीन हूँ हर पग पर, पर हर पथ का मै द्वार हूँ

wat else can i say...superb!!!

 
On September 2, 2009 at 11:10 AM , rohit said...

thank you Abhishek bhai....